करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र, हनुमान चालीसा केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक सिद्ध महामंत्र है। लेकिन ऐसा क्या है जो इसे इतना अमोघ और शक्तिशाली बनाता है? आइए इसके रहस्यों को समझते हैं।
हनुमान चालीसा की रचना महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। माना जाता है कि उन्होंने इसकी रचना सम्राट अकबर की जेल में की थी। उनके अटूट विश्वास और भक्ति ने इन 40 चौपाइयों में प्राण फूंक दिए। यह एक साधारण कविता नहीं, बल्कि एक सिद्ध संत के हृदय की पुकार है।
यह संस्कृत में नहीं बल्कि जनसाधारण की भाषा (अवधी) में लिखी गई है। अध्यात्म में ऐसी सरल और सिद्ध भाषा को साबर मंत्र कहा जाता है। इसे जपने के लिए किसी विशेष व्याकरण या कठिन नियमों की आवश्यकता नहीं होती। शुद्ध भाव ही इसे जागृत करने के लिए पर्याप्त है।
माता सीता ने हनुमान जी को "अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता" होने का वरदान दिया था। जब हम चालीसा का पाठ करते हैं, तो हम ब्रह्मांड के उस स्रोत से जुड़ जाते हैं जिसके पास जीवन की हर भौतिक और आध्यात्मिक उपलब्धि देने की शक्ति है।
चालीसा की 39वीं चौपाई में लिखा है: "जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।" इसका अर्थ है कि इस चालीसा की सफलता और सिद्धि के साक्षी स्वयं भगवान शिव (गौरीशंकर) हैं। जहां देवों के देव महादेव का आशीर्वाद हो, वह मंत्र कभी निष्फल नहीं हो सकता।