हनुमान चालीसा भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रार्थना है, लेकिन इसके भीतर कई ऐसे रहस्य और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हैं जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं।
आधुनिक विज्ञान (NASA) ने 17वीं सदी में पता लगाया कि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 149.6 मिलियन किलोमीटर है। लेकिन तुलसीदास जी ने 15वीं सदी में ही अपनी एक चौपाई में इसकी सटीक गणना दे दी थी:
"जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।"
1 जुग = 12000 वर्ष
1 सहस्र = 1000
1 जोजन = 8 मील
युग x सहस्र x योजन = 12000 x 1000 x 8 मील = 96,000,000 मील। यदि इसे किलोमीटर में बदलें तो यह लगभग 153.6 मिलियन किलोमीटर होता है, जो वैज्ञानिक गणना के बेहद करीब है।
चालीसा का अर्थ है 'चालीस' (40)। इस पूरी प्रार्थना में ठीक 40 चौपाइयां (verses) हैं। शुरू में और अंत में दोहे दिए गए हैं जो इसकी संरचना को पूर्ण करते हैं।
चालीसा की लय और शब्दावली ऐसी है कि इसका सस्वर पाठ शरीर में विशेष कंपन (vibrations) पैदा करता है। ध्वनि विज्ञान के अनुसार, "हं", "ब", "राम" जैसे अक्षरों का बार-बार उच्चारण मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है और अवसाद (depression) को दूर करने में मदद करता है।
तंत्र शास्त्र के अनुसार, हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए एक मंत्र की तरह काम करती है। उदाहरण के लिए, बीमारी मिटाने के लिए "नासै रोग हरै सब पीरा..." का जाप किया जाता है, जबकि ज्ञान प्राप्ति के लिए "बिद्यावान गुनी अति चातुर..." का प्रयोग होता है।